2019 के आगामी लोकसभा के
चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की
पेहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में बदायूं के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद धर्मेन्द्र यादव लडने जा रहें है.
वहीं सैफई कुनबे में अहम भूमिका रखने वाले
सांसद धर्मेन्द्र यादव पर ही सपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भरोसा जताया है. बता दें कि उन्हें ही सपा- बसपा गठबंधन का
प्रत्याशी बनाया गया है। इसके साथ ही धर्मेन्द्र बदायूं सीट से हैट्रिक लगाने के
इरादे से चुनाव मैदान में उतरेंगे। पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद वे सपाई
किला बचाने में कामयाब रहे थे लेकिन, इस बार चुनौतियां भी बेशुमार होंगी। लंबे समय तक सपा में रहे पूर्व
कैबिनेट मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस से उनके मुकाबले ताल ठोक चुके है.
भाजपा से भी किसी मजबूत उम्मीदवार के मैदान में उतरने के आसार हैं।
वर्ष 2009 में धर्मेंद्र यादव
ने पहली बार बदायूं से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उनसे पहले इस सीट पर सलीम
शेरवानी सपा के ही टिकट पर लगातार चार बार सांसद चुने गए थे। टिकट कटा तो शेरवानी
कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरे। जबकि डीपी यादव बसपा के टिकट पर मैदान में थे, जबकि राजग ने
यह सीट जदयू के लिए छोड़ी। डीके भारद्वाज को मैदान में उतारा था। कांटे के मुकाबले
में धर्मेंद्र यादव यहां 233744 वोट पाकर निर्वाचित हुए। 2014 के चुनाव में वह दोबारा सपा से मैदान में उतरे और 498008 वोट पाकर निर्वाचित हुए। यादव - मुस्लिम वोटरों का गठजोड़ यहां सपा की
सफलता की वजह मानी जाती रही है। तीसरी पारी के लिए वे बसपा-सपा गठबंधन का चेहरा
होंगे। उन्हें अनुसूचित जाति के वोटरों को साधने का भी मौका होगा। इसके साथ ही
धर्मेंद्र यादव के नाम राजकीय मेडिकल कॉलेज, बरेली-बदायूं फोरलेन, शहर में ओवरब्रिज निर्माण, बाईपास जैसे बड़े काम भी हैं। कुछ दिनों पहले भाजपा के विधायकों ने
मुख्यमंत्री से इसका जिक्र करते हुए कुछ बड़े काम कराने का आग्रह भी किया था।
बहरहाल, चुनाव में कौन सा फैक्टर कारगर होता यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सांसद
धर्मेंद्र यादव यहां हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में उतरे हैं।







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