Mar, 07 Mar 2019
13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम की जगह आरक्षण के पुराने 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को बहाल करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। SC/ST/OBC को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पुराने सिस्टम के हिसाब से आरक्षण को बहाल करने को मंजूरी दी गई है। जिससे बहुजन समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई है. वहीं लंबे संघर्ष के बाद मिली इस कामियाबी से लोंग काफी खुश है. अगर देखा जाए तो आम चुनाव के ऐलान होने से ठीक पहले ही मोदी सरकार ने रोस्टर मुद्दे पर गहन चर्चा और नफा-नुकसान के आकलन के बाद पुराने सिस्टम पर लौटने का फैसला लिया है। यह कदम सरकार ने पूरी तरह से सोच-समझकर उठाया है। एससी-एसटी ऐक्ट में आर्डिनेंस लाने की हड़बड़ी को लेकर विवाद झेलने के बाद इस बार पूरी तरह सतर्क थी। खासतौर पर चुनावी समय में अहम माने जाने वाले ओबीसी वोटरों की नाराजगी के डर से सरकार परेसानी में थी। वहीं एक तरफ सवर्ण वोटर थे, जिन्हें गहरी नाराजगी के बाद दस फीसदी आरक्षण देकर मनाने में सफलता पाई थी तो एक तरफ ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटर थे, जो हाल में बीजेपी के लिए सबसे मजबूत वोट बैंक बन कर उभरे थे। SC -ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर आर्डिनेंस लाने के चलते सवर्ण बीजेपी से नाराज हो गए थे, जिसका खामियाजा मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ा था। ऐसे में इस बार सीधे तौर पर इस तबके को नाराज करने का दोबारा जोखिम नहीं उठा सकती थी। यही कारण है कि लगातार विरोध के बीच भी सरकार ने इस पर साफ तौर पर कोई संकेत नहीं दिया
13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम की जगह आरक्षण के पुराने 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को बहाल करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। SC/ST/OBC को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पुराने सिस्टम के हिसाब से आरक्षण को बहाल करने को मंजूरी दी गई है। जिससे बहुजन समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई है. वहीं लंबे संघर्ष के बाद मिली इस कामियाबी से लोंग काफी खुश है. अगर देखा जाए तो आम चुनाव के ऐलान होने से ठीक पहले ही मोदी सरकार ने रोस्टर मुद्दे पर गहन चर्चा और नफा-नुकसान के आकलन के बाद पुराने सिस्टम पर लौटने का फैसला लिया है। यह कदम सरकार ने पूरी तरह से सोच-समझकर उठाया है। एससी-एसटी ऐक्ट में आर्डिनेंस लाने की हड़बड़ी को लेकर विवाद झेलने के बाद इस बार पूरी तरह सतर्क थी। खासतौर पर चुनावी समय में अहम माने जाने वाले ओबीसी वोटरों की नाराजगी के डर से सरकार परेसानी में थी। वहीं एक तरफ सवर्ण वोटर थे, जिन्हें गहरी नाराजगी के बाद दस फीसदी आरक्षण देकर मनाने में सफलता पाई थी तो एक तरफ ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटर थे, जो हाल में बीजेपी के लिए सबसे मजबूत वोट बैंक बन कर उभरे थे। SC -ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर आर्डिनेंस लाने के चलते सवर्ण बीजेपी से नाराज हो गए थे, जिसका खामियाजा मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ा था। ऐसे में इस बार सीधे तौर पर इस तबके को नाराज करने का दोबारा जोखिम नहीं उठा सकती थी। यही कारण है कि लगातार विरोध के बीच भी सरकार ने इस पर साफ तौर पर कोई संकेत नहीं दिया







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