धर्मेन्द्र यादव
का जन्म जनपद इटावा के सैफई गाँव में 3 फरवरी 1979 को अभयराम सिंह के घर हुआ.
धर्मेन्द्र यादव सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के भतीजे और उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई है बता दें कि धर्मेंद्र यादव की आठवीं
कक्षा तक की शिक्षा सैफई में हुई. इसके बाद वो उच्च शिक्षा के लिए वह इलाहाबाद चले
गए. जहां उन्होंने राजनीति विज्ञान से एमए और एलएलबी की. वहीं धर्मेन्द्र यादव
पढाई के साथ-साथ राजनीति के गुण भी सिखें इस दौरान धर्मेंद्र यादव ने समाजवादी
पुरोधा जनेश्वर मिश्रा के सानिध्य में छात्र राजनीति की. इस बीच धर्मेंद्र यादव
राजनीति में सक्रीय रहे. वहीं इलाहाबाद में सपा का परचम लहराने का श्रेय जनेश्वर
मिश्रा को जाता है तो उनके सहायक के तौर पर धर्मेंद्र यादव यादव का भी नाम लिया
जाता है.
इसके बाद धर्मेन्द्र
यादव पहली बार 2003 में सैफई ब्लॉक प्रमुख के तौर पर निर्वाचित हुए। उस समय मुलायम
सिंह यादव मैनपुरी लोकसभा सीट से सांसद थे। वर्ष 2004 में मुलायम सिंह ने उत्तर
प्रदेश का मुख्ययमंत्री बनने पर यह सीट छोड़ दी। तब धर्मेंद्र यादव उपचुनाव में
डेढ़ लाख वोट से जीतकर मैनपुरी से सांसद बने। मैनपुरी से लोकसभा उपचुनाव जीतने
वाले धर्मेंद्र यादव महज 25 वर्ष की आयु में सांसद बन गए। तब वह 14वीं लोकसभा के
सबसे युवा सांसद थे। बाद में वह वर्ष 2009 में दोबारा बदायूं से चुनाव लड़े और
भारी मतों से जीते। पुनः 2014 के लोकसभा चुनाव में धर्मेन्द्र यादव बदायूं से भारी
मतों से विजयी हुए। धर्मेंद्र यादव वर्ष 2005-2007 तक यूपी को-ऑपरेटिव बैंक के
चेयरमैन भी रहे है।
2012 विधानसभा
चुनाव में मुख्यमंत्री महोदय ना सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष थे अपितु युवा संगठन के
प्रभारी भी थे। अखिलेश जी की कार्यकुशलता और बेजोड़ मेहनत का नतीजा था कि पार्टी
युवाओं को एकजुट करने में कामयाब रही, फलतः पार्टी की भारी बहुमत से सत्ता वापसी हुई थी। परिस्थितियाँ
बदल गयी है और अखिलेश जी के कार्यक्षेत्र में बहुत बड़ा विस्तार हुआ है। आज अखिलेश
जी की छवि देश विदेश में निखर रही है। ऐसे में अगर अखिलेश जी को राष्ट्रीय स्तर पर
प्रस्तुत करना है तो प्रदेश स्तर पर किसी युवा और जुझारू नेता को आगे लाना ही
होगा। इस कसौटी पर धर्मेन्द्र यादव बेहद खरे उतरते है। सैंतीस वर्षीय धर्मेन्द्र
यादव ना सिर्फ युवा है अपितु उनकी युवाओं अच्छी खासी पकड़ भी है। उनका अनुभव युवा
क्रान्ति को एक नयी दिशा और ऊँचाइयाँ प्रदान कर सकता है।
पार्टी की मुख्य
इकाई के साथ-साथ सहयोगी इकाइयों की डगर इतनी आसान नहीं है जितनी कि लोग सोच रहे
है। एक तो सत्ता पक्ष का विरोध ऊपर से विपक्षियों के षड्यंत्र विकास को नेपथ्य में
धकेल देते है। पार्टी की मुख्य इकाई का प्रभार पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह
के हाथ में है और वो यकीनन पार्टी को संगठित करने में कामयाब होंगे। विगत वर्षों में
धर्मेन्द्र यादव ने युवाओं को जोड़ने और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का सफल
प्रयास किया है। जब सीसैट के खिलाफ दिल्ली में प्रतियोगी छात्रों पर लाठियाँ पड़
रही होती है तब ना सिर्फ धर्मेन्द्र छात्रों से मिलने जाते है अपितु सँसद में भी
ये मुद्दा जोर-शोर से उठाते है।
बतौर सांसद अगर
धर्मेन्द्र यादव का विश्लेषण किया जाए तो इसमें भी युवा सांसद की सक्रियता देश के
चुनिन्दा सांसदों में से है। सँसद में किसानों और छात्रों की आवाज़ बेबाक रूप से
उठाने में श्री यादव अग्रणी है। हाल के दिनों में युवा सांसद ने लोकसभा में
किसानों और आरक्षण के मुद्दे पर लोकसभा का ध्यान आकृष्ट करने का सफल और प्रभावी
प्रयास किया है। सन 2011-12 में जब दिग्गज नेता सदन में आराम फरमा रहे थे, तब युवा सांसद धर्मेन्द्र यादव ने दो सौ से
अधिक प्रश्न पूछ कर सदन को अपनी अहमियत का एहसास करा दिया था।
धर्मेन्द्र यादव
संयुक्त राष्ट्र महासभा में देश का प्रतिनिधित्व कर विश्व मँच पर पार्टी और देश का
गौरव बढ़ा चुके है। 10 अक्टूबर 2012 को न्यूयार्क में “मादक पदार्थों की तस्करी” पर हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण देकर धर्मेन्द्र यादव ने “मादक पदार्थों की तस्करी एवम् आतंकवाद” को वैश्विक समस्या बताते हुए मादक पदार्थों के
320 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार पर गहन चिन्ता व्यक्त की थी।1996-97 में
तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा द्वारा घोषित इटावा-मैनपुरी रेलवे लाइन की
उपेक्षा तत्कालीन सरकार द्वारा किये जाने पर धर्मेन्द्र यादव ने इसका सड़क से लेकर
सँसद तक जोर दार विरोध किया। मैनपुरी से सम्भल रेलवे लाइन को गजरौला तक बढ़वाने का
श्रेय भी धर्मेन्द्र यादव को जाता है। बतअपने संसदीय
क्षेत्र बदायूँ में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज बनवाने का श्रेय भी धर्मेन्द्र
यादव को है। विधानसभा चुनाव 2012 में धर्मेंद्र यादव की बदौलत ही बदायूं के
मतदाताओं ने सपा के पांच उम्मीदवारों को विधायक बनाया था। बदायूँ सांसद
धर्मेन्द्र यादव की छवि बेदाग है जो खासकर युवा वर्ग को बेहद प्रभावित करती है।
अपने आज तक के राजनीतिक कैरियर में धर्मेन्द्र यादव अधिकतर विवादों से दूर ही रहे
है। बेहद शान्त स्वभाव के धर्मेन्द्र यादव ने आज तक कोई विवादास्पद वक्तव्य नहीं
दिया है। धर्मेन्द्र यादव
को युवा वर्ग का प्रभार देने का एक कारण ये भी हो सकता है कि वह कॉलेज समय से ही
छात्र समस्याओं के लिए संघर्ष कर रहे है। उम्र की परिपक्वता और जिम्मेदारियों के
एहसास ने धर्मेन्द्र यादव को और अधिक संवेदनशील बनाया है। ऐसे में युवा वर्ग को
धर्मेन्द्र जी से काफी कुछ सीखने को मिल सकता है।
सैफई परिवार में अखिलेश जी के बाद धर्मेन्द्र यादव ही
है जो नेतृत्व को दिशा दे सकते है। अखिलेस जी के बेहद नजदीक और विश्वासपात्र
धर्मेन्द्र यादव 2012 में अखिलेश जी के साथ क्रांति रथ पर भी लगातार साथ बने रहे
थे, जिससे
उन्हें युवाओं को समझने का पर्याप्त अवसर मिला







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